मेला केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि बदलते दौर की तस्वीर है
बीजापुर/आवापल्ली। कभी लाल आतंक के साए में दहशत भरी रातें गुजारने वाला इलाका आज रोशनी, रौनक और खुशियों से जगमगा रहा है। बीजापुर जिले के उसूर ब्लॉक के आवापल्ली कस्बे में इस वर्ष महाशिवरात्रि का पर्व ऐतिहासिक बन गया है। पहली बार यहां दस दिनों तक चलने वाले भव्य मेले का आयोजन किया गया है, जिसने पूरे क्षेत्र की तस्वीर और तासीर बदलने का संदेश दे दिया है।
एक समय था जब यहां त्योहार या उत्सव मनाने के लिए भी क्षेत्रीय थानों से अनुमति लेनी पड़ती थी। सलवा जुडूम के दौर में लोग शाम ढलते ही घरों में दुबक जाते थे। रातें भयावह और सन्नाटे से भरी होती थीं। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। विकास और शांति की नई बयार के बीच आवापल्ली में महाशिवरात्रि का मेला उम्मीद और विश्वास का प्रतीक बनकर उभरा है।
मेले में दूर-दराज के गांवों से पहुंचे श्रद्धालु दिन में मंदिरों में पूजा-अर्चना कर रहे हैं, तो शाम ढलते ही पूरा कस्बा रोशनी से नहा उठता है। नागरिक आकाश झूला, डिस्को झूला, मिक्की माउस, जंपिंग झूला और ड्रेगन झूला जैसे आकर्षणों का भरपूर आनंद ले रहे हैं। बच्चों की खिलखिलाहट, युवाओं का उत्साह और परिवारों की चहल-पहल मेले को जीवंत बना रही है। दुकानों की कतारों से सजा मेला परिसर देर रात तक गुलजार रहता है।
घूमने आए स्थानीय नागरिकों का कहना है कि उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि आवापल्ली में इतने बड़े स्तर पर मेला लगेगा। लोगों के चेहरे पर उत्सुकता और गर्व साफ झलक रहा है।
यह मेला केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि बदलते दौर की तस्वीर है—जहां डर की जगह विश्वास ने ले ली है और सन्नाटे की जगह उत्सव ने। आवापल्ली का यह ऐतिहासिक आयोजन आने वाले समय में क्षेत्र के सामाजिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की नई कहानी लिखने की ओर बढ़ता कदम माना जा रहा है।
