
बीजापुर। जिले के शिक्षा विभाग में इन दिनों पढ़ाई-लिखाई से ज्यादा चर्चा जिला शिक्षा अधिकारी की कुर्सी की हो रही है। हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं कि अगर सब कुछ कागजों के मुताबिक चला तो बीजापुर में एक नहीं, दो नहीं बल्कि तीन-तीन जिला शिक्षा अधिकारी नजर आ सकते हैं।
राज्य शासन ने तबादला सूची जारी करते हुए राजेश कुमार पांडे को बीजापुर का प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बनाकर भेज दिया है। लेकिन कहानी इतनी सीधी भी नहीं है। जिले में पहले से ही लखन लाल धनिलिया ट्रांसफर आदेश पर न्यायालय से राहत लेकर जमे हुए हैं। वहीं राज्य प्रशासनिक सेवा से नियुक्त राजकुमार कटौते भी जिला शिक्षा अधिकारी की भूमिका निभाते रहे हैं। अब नए प्रभारी अधिकारी की एंट्री के बाद शिक्षा विभाग के गलियारों में सवाल गूंज रहा है कि आखिर असली कप्तान कौन है?
चर्चा यह भी है कि अगर पहले की तरह नए आदेशों पर भी न्यायालय की शरण ली गई और राहत मिल गई तो बीजापुर ऐसा जिला बन सकता है जहां शिक्षा विभाग में अधिकारी गिनने के लिए उंगलियां कम पड़ जाएं। कर्मचारी भी मजाक में पूछ रहे हैं कि आखिर फाइल लेकर किस कमरे में जाएं और किस साहब के आदेश को अंतिम आदेश मानें।
जानकारों का कहना है कि शासन चाहे जितनी तबादला सूची जारी कर दे, लेकिन जब तक पुराने विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं होते, तब तक हर नए आदेश के साथ नया अध्याय जुड़ता रहेगा। शिक्षा विभाग की यह कहानी अब किसी प्रशासनिक आदेश से ज्यादा एक धारावाहिक जैसी लगने लगी है, जिसमें हर कुछ महीने बाद नया किरदार प्रवेश कर जाता है।
दिलचस्प बात यह है कि जिले में दो-दो जिला शिक्षा अधिकारियों के होने का मुद्दा पहले भी विधानसभा तक पहुंच चुका है। क्षेत्रीय विधायक विक्रम शाह मंडावी इस मामले को सदन में उठा चुके हैं। लेकिन लगता है कि सवाल का जवाब मिलने से पहले कहानी में एक और पात्र की एंट्री हो गई।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि शिक्षा विभाग की इस ‘डीईओ लीला’ का अगला एपिसोड क्या होगा। फिलहाल बीजापुर में चर्चा यही है कि जिले में स्कूल कितने हैं, यह तो सब जानते हैं, लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी आखिर कितने हैं, इसका जवाब देना थोड़ा मुश्किल हो जायेगा।

