रेलवे महाराष्ट्र मंडळ में वैदिक परंपरा के अनुसार श्रावणी उपाकर्म संपन्न

बिलासपुर। वैदिक परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाने वाले श्रावणी उपाकर्म का आयोजन बुधवार, 26 अगस्त 2026 को रेलवे महाराष्ट्र मंडळ, टिकरापारा, बिलासपुर में विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धापूर्वक संपन्न हुआ।

श्रावणी उपाकर्म सनातन वैदिक परंपरा का एक प्राचीन एवं महत्वपूर्ण संस्कार है। प्राचीन काल से ही वेदाध्ययन करने वाले द्विजों द्वारा अपनी-अपनी वेदशाखा एवं गृह्यसूत्र के अनुसार इस अवसर पर वेदाध्ययन के नवीनीकरण तथा विभिन्न धार्मिक संस्कारों का विधान रहा है। यह पर्व केवल यज्ञोपवीत परिवर्तन तक सीमित नहीं है, बल्कि वेद, ऋषि, आचार्य एवं पितृ परंपरा के प्रति कृतज्ञता तथा वर्षभर धर्माचरण के संकल्प का पर्व है।

आयोजन में मुख्य आचार्य  सौरभ अनिल टिकेकर ने विधि-विधान संपन्न कराया। उनके साथ सहायक आचार्य योगेश चंद्रप्रकाश दिघ्रस्कर एवं वासुदेव शर्मा ने धार्मिक अनुष्ठानों में सहयोग प्रदान किया। उनके मार्गदर्शन में पंचगव्य प्राशन एवं संकल्प के पश्चात उत्सर्जन होम संपन्न किया गया। इसके बाद ब्रह्मयज्ञ एवं स्वाध्याय, पवित्र स्नान, देव-ऋषि-आचार्य एवं पितृ तर्पण तथा यम तर्पण किया गया। सप्तऋषियों का षोडशोपचार पूजन भी विधिपूर्वक संपन्न हुआ।

उत्सर्जन होम के पश्चात उपाकर्म की मुख्य विधि प्रारंभ हुई। अग्निहोम में दही एवं सत्तू की आहुतियां अर्पित की गईं तथा विधि-विधान के अनुसार नवीन यज्ञोपवीत धारण किया गया। इस अवसर पर यज्ञोपवीत दान की धार्मिक परंपरा का भी स्मरण किया गया।

श्रावणी उपाकर्म के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि प्राचीन समय में वेदाध्ययन करने वाले विद्यार्थी उपाकर्म के पश्चात गुरुगृह में रहकर निरंतर वेदाध्ययन करते थे तथा माघ मास में उत्सर्जन के साथ अध्ययन को विराम देते थे। इस प्रकार हमारे पूर्वजों ने अपने लौकिक जीवन के दायित्वों का निर्वहन करते हुए पीढ़ी-दर-पीढ़ी वेदों की रक्षा की। लौकिक जीवन और अलौकिक वेदवाणी के बीच यह संतुलन सनातन धर्म की समन्वयकारी एवं सर्वसमावेशी विचारधारा का सुंदर प्रतीक है।

कार्यक्रम में कहा गया कि श्रावणी केवल जनेऊ बदलने का पर्व नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि, स्वाध्याय, संस्कार और धर्माचरण के प्रति अपने संकल्प को पुनः जागृत करने का अवसर है। ऐसी प्राचीन आर्ष परंपराओं को वर्तमान पीढ़ी तक पहुंचाना और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

इस अवसर पर रेलवे महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष मोहन देवपुजारी, शरद चिमोटे, पंकज खेड़कर, चिन्मय चिंचोलकर,  माधव पागे, सूर्यांशु प्रवीण काले, अरीन आशीष पळसुले,  अथर्व आशीष पळसुले, सुनील रघुनाथ मार्डीकर, एवं  मोहन दत्तात्रय होनप ने श्रावणी उपाकर्म की धार्मिक क्रियाओं में सहभागिता की।

आयोजन में रेलवे महाराष्ट्र मंडल के कोषाध्यक्ष प्रशांत महादेवकर एवं सदस्य प्रवीण काले , बाली बल्हाल,  राहुल रामभजनी , नीलकंठ इंगले ने सहयोग प्रदान किया।

आयोजकों ने कहा कि वेद एवं सनातन संस्कृति की इस प्राचीन परंपरा को जीवंत बनाए रखने तथा युवा पीढ़ी को अपनी वैदिक विरासत से जोड़ने के लिए ऐसे आयोजनों को निरंतर आगे बढ़ाया जाएगा।

gondwananews.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You May Like