बिलासपुर प्रेस क्लब में पूर्व मंत्री ने राजनीति, प्रशासनिक अनुभव और शहर के विकास पर की खुलकर बातचीत

बिलासपुर। बिलासपुर प्रेस क्लब के परंपरागत संवाद कार्यक्रम “हमर पहुना” में रविवार को छत्तीसगढ़ शासन के पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं बिलासपुर विधायक अमर अग्रवाल शामिल हुए। उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन, पारिवारिक पृष्ठभूमि, मंत्री के रूप में अनुभव, स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए कार्यों और बिलासपुर के विकास की भावी योजनाओं पर पत्रकारों से खुलकर संवाद किया।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रेस क्लब पदाधिकारियों द्वारा श्री अग्रवाल के स्वागत से हुई। इस दौरान प्रेस क्लब अध्यक्ष अजीत मिश्रा, उपाध्यक्ष विजय क्रांति तिवारी, सचिव संदीप करीहार, कोषाध्यक्ष किशोर सिंह ठाकुर, सह सचिव हरिकिशन गंगवानी, कार्यकारिणी सदस्य कैलाश यादव सहित पत्रकार साथी उपस्थित रहे।
‘राजनीति में आया नहीं, राजनीति के वातावरण में पैदा हुआ,
अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत पर अमर अग्रवाल ने कहा कि उनका परिवार लंबे समय से सार्वजनिक जीवन और राजनीति से जुड़ा रहा है। उनके पिता स्वर्गीय लखीराम अग्रवाल जनसंघ और बाद में भारतीय जनता पार्टी की राजनीति में सक्रिय रहे। अमर अग्रवाल ने कहा कि उनका जन्म 1963 में हुआ और घर में शुरू से ही राजनीतिक वातावरण रहा।
उन्होंने अपने छात्र जीवन का उल्लेख करते हुए बताया कि खरसिया में हाईस्कूल के दौरान उन्होंने छात्र संघ का चुनाव भी लड़ा और एक वर्ष अध्यक्ष रहे। हालांकि उस समय राजनीति में उनकी विशेष रुचि नहीं थी। उन्होंने बताया कि प्रारंभ में डॉक्टर बनने की इच्छा थी और बायोलॉजी विषय लिया था, लेकिन बाद में उन्होंने बीकॉम की पढ़ाई की तथा बिलासपुर के सीएमडी कॉलेज से शिक्षा पूरी की।
पिता और कुशाभाऊ ठाकरे से मिली प्रेरणा
अग्रवाल ने बताया कि 1990 के आसपास उन्होंने अपने पिता के साथ सहायक के रूप में काम करना शुरू किया। उस समय उनके पिता प्रदेश भाजपा के महत्वपूर्ण दायित्व में थे। उन्होंने कहा कि बचपन से ही अटल बिहारी वाजपेयी, कुशाभाऊ ठाकरे और अन्य वरिष्ठ नेताओं का उनके घर आना-जाना रहा।
उन्होंने कहा कि कुशाभाऊ ठाकरे ने भी उन्हें राजनीति में सक्रिय होने के लिए प्रेरित किया। “मेरे राजनीतिक जीवन में पिता की भूमिका के साथ-साथ कुशाभाऊ ठाकरे और अनेक वरिष्ठ नेताओं का मार्गदर्शन रहा। उनसे व्यवहारिक जीवन और संगठन के बारे में बहुत कुछ सीखने को मिला।”
पहली बार मंत्री बनने पर सीखने को बनाया मूल मंत्र
2003 में विधायक बनने और सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी मिलने का अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि शुरुआत में उनके लिए कई चीजें नई थीं। वित्त मंत्री बनने के बाद पहली फाइल को समझने में काफी समय लगा। इसके बाद उन्होंने अधिकारियों से सवाल पूछने और व्यवस्था को समझने में कभी संकोच नहीं किया। उन्होंने कहा, “जो चीज मैं नहीं जानता, उसे पूछने में मुझे कभी संकोच नहीं हुआ। सीखने की आदत मेरे बहुत काम आई।” अग्रवाल ने बताया कि लगातार अध्ययन और अनुभव के बाद उनकी कार्यक्षमता बढ़ी और वे बड़ी संख्या में फाइलों का तेजी से निपटारा करने लगे।
विदेशों से सीखा, छत्तीसगढ़ में लागू करने का प्रयास
स्वास्थ्य मंत्री के रूप में अपने अनुभवों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विदेश यात्राओं के दौरान उनका उद्देश्य केवल घूमना नहीं, बल्कि वहां की व्यवस्थाओं को समझना था। उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन सहित विभिन्न संस्थाओं और देशों की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का अध्ययन किया।
उन्होंने बताया कि इसी अध्ययन से उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की नई सोच मिली, जिसके आधार पर संजीवनी एक्सप्रेस जैसी व्यवस्था विकसित करने की प्रेरणा मिली।
उन्होंने कहा कि जब वे स्वास्थ्य मंत्री बने, तब प्रदेश में संस्थागत प्रसव की स्थिति काफी कम थी। इसके बाद महतारी एक्सप्रेस सहित विभिन्न व्यवस्थाओं के माध्यम से अस्पतालों में प्रसव को बढ़ावा दिया गया।
‘सरकार के साथ समाज की भागीदारी जरूरी’
अग्रवाल ने कहा कि केवल सरकार के प्रयासों से स्वास्थ्य, स्वच्छता, पर्यावरण और यातायात जैसी समस्याओं का पूरी तरह समाधान संभव नहीं है। इसके लिए सामाजिक संस्थाओं, धार्मिक संगठनों और आम नागरिकों की भागीदारी आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में जागरूकता को लेकर वे आज भी काम की आवश्यकता महसूस करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित ब्लड प्रेशर जांच, स्वच्छ पानी और व्यवहार में बदलाव जैसी छोटी-छोटी सावधानियां गंभीर बीमारियों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
‘विधायक हूं या मंत्री, जनता के लिए काम करने की इच्छा नहीं बदलती’
बिलासपुर के विकास पर चर्चा करते हुए अग्रवाल ने कहा कि पद से ज्यादा महत्वपूर्ण काम करने की इच्छाशक्ति है। उन्होंने कहा कि मंत्री रहते हुए प्रशासनिक सुविधा अधिक होती है, लेकिन विधायक के रूप में भी लगातार प्रयास किए जा सकते हैं।
उन्होंने बिलासपुर में प्रस्तावित ओवरब्रिज, बाईपास, एजुकेशन हब, अरपा नदी, जल निकासी, एयरपोर्ट और अन्य विकास योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कई योजनाएं ऐसी हैं जिनका परिणाम तत्काल नहीं दिखेगा, लेकिन आने वाले वर्षों में उनका प्रभाव दिखाई देगा।
उन्होंने कहा कि बिलासपुर के लिए दीर्घकालिक विकास की योजनाओं को बजट में शामिल कराने के साथ विभागीय स्तर पर उनकी लगातार समीक्षा भी की जा रही है।
‘ड्रीम प्रोजेक्ट से ज्यादा जरूरी अधूरे काम पूरे करना’
अपने ड्रीम प्रोजेक्ट के सवाल पर अग्रवाल ने कहा कि शहर के विकास की योजनाएं अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों होती हैं। सड़क, बिजली और पानी जैसी जरूरतें तत्काल होती हैं, जबकि यातायात व्यवस्था, शहर का विस्तार और शिक्षा जैसे विषयों के परिणाम आने में वर्षों लगते हैं।
उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान जिन अधूरे कार्यों को पूरा कराने का संकल्प लिया था, उनमें से कई कार्य पूरे किए गए हैं। एजुकेशन हब सहित कई योजनाओं को आगे बढ़ाया गया है।
‘व्यवस्थित जीवन में समय की कमी नहीं होती’
अपने व्यक्तिगत जीवन के बारे में पूछे जाने पर अमर अग्रवाल ने कहा कि वे जीवन को एक सिस्टम के तहत चलाने में विश्वास रखते हैं।
उन्होंने कहा, “अगर जीवन व्यवस्थित है तो व्यक्ति नहीं, सिस्टम काम करता है। सभी के पास 24 घंटे होते हैं। जरूरत है समय का सही प्रबंधन करने की।”
खान-पान के बारे में उन्होंने बताया कि वे शाकाहारी हैं और घर के सामान्य भोजन के साथ विभिन्न प्रकार के वेजिटेरियन व्यंजन पसंद करते हैं। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि समोसा, वड़ा और भजिया जैसी तली हुई चीजें हर किसी की कमजोरी होती हैं।
विकसित भारत में युवाओं की बड़ी भूमिका
कार्यक्रम के अंतिम चरण में युवाओं की भूमिका पर उन्होंने कहा कि भारत 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है और इस यात्रा में युवाओं की भूमिका निर्णायक होगी। उन्होंने नई शिक्षा नीति, स्किल डेवलपमेंट, इनोवेशन, स्टार्टअप और स्टैंड-अप जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं को उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाना चाहिए।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे किसी के बहकावे में न आएं, जानकारी हासिल करें, स्वयं विचार करें और अपने निर्णय खुद लें। उन्होंने कहा कि अनुशासन, शिक्षा, कौशल और जागरूकता ही युवाओं को विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत बनाएंगे।कार्यक्रम के अंत में अमर अग्रवाल ने बिलासपुर प्रेस क्लब और पत्रकार साथियों का आभार व्यक्त किया। “हमर पहुना” कार्यक्रम में हुआ यह संवाद उनके राजनीतिक सफर के साथ-साथ उनके व्यक्तिगत अनुभवों और बिलासपुर के भविष्य को लेकर उनकी सोच को सामने लाने वाला रहा।
