
राज्य उत्सव पर वन मंत्री करेंगे जंगल सफारी का लोकार्पण, इंद्रावती टाइगर रिजर्व के मद्देड़ बफर जोन के भोपाल पटनम में पर्यटन को मिलेगा नया आयाम, स्थानीय युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के रास्ते
बीजापुर। नक्सलवाद के साये से बाहर निकलता बीजापुर अब विकास के साथ पर्यटन की नई पहचान बनाने की ओर अग्रसर है। कभी नक्सली गतिविधियों के कारण सुर्खियों में रहने वाले इस आदिवासी अंचल के घने जंगल अब पर्यटकों को आकर्षित करने की तैयारी में हैं। राज्य उत्सव के अवसर पर राज्य शासन ने जिले को एक बड़ी सौगात दी है। मद्दे इंद्रावती टाइगर रिजर्व के अंतर्गत भोपालपटनम क्षेत्र के मद्देड़ बफर जोन में जंगल सफारी का निर्माण कराया जा रहा है, जिसका लोकार्पण कल वन मंत्री केदार कश्यप करेंगे।

जंगल सफारी की शुरुआत बीजापुर जिले में पर्यटन विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगल और वन्यजीवों से समृद्ध इस इलाके में पर्यटन की संभावनाएं लंबे समय से मौजूद रही हैं, लेकिन नक्सलवाद के कारण इन संभावनाओं को विकसित करने की राह आसान नहीं थी। अब बदलते सुरक्षा परिदृश्य के बीच शासन की यह पहल क्षेत्र को पर्यटन के नए मानचित्र पर स्थापित करने की उम्मीद जगा रही है।
स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार का अवसर
इस जंगल सफारी से सबसे बड़ी उम्मीद स्थानीय ग्रामीणों और युवाओं को है। सफारी के संचालन से गाइड, वाहन चालक, पर्यटन प्रबंधन और अन्य गतिविधियों में स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिल सकते हैं। पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय खानपान, हस्तशिल्प और छोटे कारोबार को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। इससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल सकती है।
बदलती पहचान, नई उम्मीदें
बीजापुर की पहचान अब केवल नक्सलवाद और संघर्ष तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यहां की प्राकृतिक विरासत, आदिवासी संस्कृति और वन संपदा पर्यटन के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंच सकती है। मद्देड़ बफर जोन भोपाल पटनम में जंगल सफारी की शुरुआत इसी बदलाव की एक नई तस्वीर पेश कर रही है। नक्सलवाद के खात्मे के बाद अब शासन की कोशिश है कि दूरस्थ वनांचलों तक विकास की पहुंच बने और स्थानीय लोगों को अपनी ही जमीन पर आजीविका के अवसर मिलें। ऐसे में मद्देड़ की जंगल सफारी केवल पर्यटन सुविधा नहीं, बल्कि शांति के बाद विकास और रोजगार की ओर बढ़ते बीजापुर की नई पहचान बन सकती है।
