तेलंगाना की सांस्कृतिक परंपरा का बीजापुर में दिखा रंग, पारंपरिक गीतों और फूलों के साथ महिलाओं ने मनाया पर्व

बीजापुर। छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती जिले बीजापुर में तेलंगाना की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का रंग देखने को मिला। तेलंगाना के प्रमुख लोकपर्व बथुकम्मा को जिले में महिलाओं ने बड़े उत्साह और धूमधाम से मनाया। फूलों से सजी आकर्षक आकृतियों, पारंपरिक वेशभूषा और लोकगीतों के बीच पर्व की रौनक देखते ही बनी।

बथुकम्मा तेलंगाना का एक विशिष्ट लोकपर्व है, जिसे आश्विन मास में नवरात्रि के दौरान नौ दिनों तक मनाया जाता है। इस पर्व का नाम जीवन और मातृशक्ति से जुड़ा है। महिलाएं मौसमी एवं प्राकृतिक फूलों को एक के ऊपर एक सजाकर शंकु के आकार की सुंदर संरचना तैयार करती हैं। इसके बाद महिलाएं पारंपरिक परिधानों में फूलों की इन आकृतियों के चारों ओर एकत्र होकर लोकगीत गाती हैं और सामूहिक रूप से उत्सव मनाती हैं। पर्व के अंतिम चरण में फूलों का जल निकायों में विसर्जन किया जाता है।
सीमावर्ती संबंधों से संस्कृति का आदान-प्रदान
तेलंगाना की सीमा से लगे होने के कारण बीजापुर जिले में लंबे समय से तेलंगाना की भाषा, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक परंपराओं की झलक देखने को मिलती रही है। बथुकम्मा पर्व इसका एक उदाहरण है, जो दोनों क्षेत्रों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाता है।
बीजापुर में इस पर्व का उत्साह स्थानीय सांस्कृतिक विविधता और परंपराओं के प्रति लोगों के लगाव को सामने लाता है। फूलों के माध्यम से प्रकृति और मातृशक्ति के प्रति सम्मान व्यक्त करने वाला यह पर्व महिलाओं के सामूहिक सहभागिता और सांस्कृतिक एकजुटता का भी प्रतीक है।
