योजनाबद्ध तरीके से किसानों के संगठन को हटाकर अन्य को लाभ पहुंचाने की कोशिश

बीजापुर । इन्द्रावती फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी प्रा.लि. (एफपीओ) ने जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में गारमेंट फैक्ट्री और सी-मार्ट संचालन से हटाए जाने, किसानों के संगठन के साथ अन्याय, आर्थिक नुकसान और कथित भ्रष्टाचार की जांच की मांग की गई है।

एफपीओ का कहना है कि वर्ष 2022 से संगठन किसानों के हित में कार्य कर रहा है तथा वर्ष 2023 से गारमेंट फैक्ट्री और सी-मार्ट का संचालन भी कर रहा था। संस्था के अनुसार, गारमेंट फैक्ट्री से एफपीओ को कभी कोई लाभ नहीं मिला, जबकि कागजों में लाभ दिखाया जाता रहा। आरोप लगाया गया है कि कौशल विकास विभाग द्वारा ब्लैंक चेक पर हस्ताक्षर करवाकर राशि निकाली गई और जब एफपीओ ने इसका विरोध किया तो बिना पूर्व सूचना के उन्हें संचालन से हटा दिया गया।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि तत्कालीन जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी हेमंत नंदनवार द्वारा सी-मार्ट संचालन जारी रखने और प्रस्ताव तैयार करने को कहा था। किसानों के हित को देखते हुए संगठन ने उस समय कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की।
एफपीओ ने सी-मार्ट भवन की स्थिति को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। संस्था के अनुसार भवन शुरू से ही जर्जर स्थिति में है और हर कुछ महीनों में छत का पीओपी गिरता रहता है, जिसकी मरम्मत संस्था अपने खर्च पर कराती रही। बार-बार मरम्मत और संसाधनों की कमी के कारण संस्था आर्थिक रूप से कमजोर हो गई, जिससे कर्मचारियों का मानदेय देना और संचालन जारी रखना कठिन हो गया।
संस्था ने बताया कि बैंक से ऋण लेने के लिए लीज एग्रीमेंट आवश्यक था, जिसके लिए जिला पंचायत और प्रशासन को कई बार आवेदन और प्रस्ताव दिए गए, लेकिन केवल आश्वासन मिला। बाद में प्रशासन द्वारा सी-मार्ट संचालन के लिए टेंडर प्रक्रिया की बात कही गई, जिससे किसानों में नाराजगी बढ़ी।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि फरवरी 2026 में जिला पंचायत अधिकारियों ने बंद पड़े सी-मार्ट का निरीक्षण कर डेमो उत्पादों को एक्सपायरी बताते हुए नोटिस जारी किया और बिना संतोषजनक जवाब का अवसर दिए परिसर खाली कराने की कार्रवाई शुरू कर दी। इसके विरोध में किसान संगठन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर स्थगन आदेश प्राप्त किया।
एफपीओ ने कलेक्टर से मांग की है कि गारमेंट फैक्ट्री और सी-मार्ट से जुड़े पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए। साथ ही जर्जर सी-मार्ट भवन की मरम्मत कर संस्था को लीज पर संचालन का अवसर दिया जाए ताकि बैंक ऋण लेकर स्थानीय उत्पादकों और किसानों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराया जा सके।
संस्था ने यह भी आरोप लगाया कि योजनाबद्ध तरीके से किसानों के संगठन को हटाकर किसी अन्य को लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि प्रशासन आज भी कई दस्तावेजों और बिजली बिल में इन्द्रावती एफपीओ का नाम उपयोग कर रहा है, जबकि संचालन से उन्हें अलग कर दिया गया है। इस दौरान एफपीओ ने नए कलेक्टर से किसान हित में निष्पक्ष निर्णय लेने, भ्रष्टाचार की जांच कराने और संगठन को पुनः कार्य करने का अवसर देने की मांग की है।

