फर्श से अर्श तक पहुंचाने वाले कार्यकर्ता हाशिए पर, नए भाजपाइयों को मंच-माला-माइक से प्यार

बिलासपुर। सत्ता हासिल करने के बाद भाजपा की कार्यसंस्कृति में कितना बदलाव आया है, इसका अंदाजा बिलासपुर भाजपा की मौजूदा तस्वीर देखकर लगाया जा सकता है। कभी कैडर आधारित संगठन के रूप में अपनी अलग पहचान रखने वाली भाजपा में अब पद, प्रतिष्ठा, मंच और राजनीतिक पहुंच की होड़ बढ़ने की चर्चा है। पार्टी को सत्ता तक पहुंचाने के लिए वर्षों तक जमीन पर संघर्ष करने वाले पुराने और समर्पित कार्यकर्ता जहां पीछे छूटते नजर आ रहे हैं, वहीं महत्वाकांक्षी नेताओं की नई जमात संगठन में अपना प्रभाव बढ़ाने में जुटी हुई है।
सत्ता प्राप्ति के बाद भाजपा में सब कुछ बदल गया है। ज्यादातर भाजपाई महत्वाकांक्षी हों गये है। सब मंच पर बैठना चाहते है। जिस भाजपा को सत्ता तक पहुंचाने के लिए पार्टी के कर्मठ और जमीनी स्तर के नेताओं ने अपनी जिंदगी खपा दी उसी भाजपा के वर्तमान पीढ़ी के युवा नेताओं ने पार्टी की दुर्गति करने और अपना भला करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। वे दिन हवा हों गये ज़ब भाजपा संगठन में मंच, माला, माइक से दूर रहने की सीख दी जाती थी तब कार्यकर्त्ता इस सीख का पालन भी शिद्दत से करते थे। तब भाजपा वास्तव में कैडर बेस पार्टी थी लेकिन अब सब कुछ बदल चुका है। कार्यकर्ताओ का ऐसा झुण्ड पार्टी में शामिल हों गया है जो भाजपा के सिद्धांतो से कोसो दूर है। यह बात बिलासपुर भाजपा में शत प्रतिशत लागू होता है। छूटभइये युवा नेताओ को पार्टी स्वागत मतलब नहीं उनको बस एक आका का वरद हस्त काफी है। अब तो बिलासपुर को छोड़ रायपुर से आका बनाना शुरू कर दिए. है। पत्नी कोई पद में है तो पति का जलवा जलाल है। एक नेता पति तो कहते घूमता है कि 3 करोड़ देकर पत्नी के लिए टिकट लाया था। पत्नी जीत गई है तो जलवा जलाल काटूंगा ही। ईंट,सीमेंट, रेत, कोयला का धंधा करने वाले पार्टी के पदाधिकारी भी बन जाते है लेकिन जमीनी कार्यकर्त्ता पीछे रह जाते है। जिला भाजपा में अब कार्यकर्ताओ की भीड़ नहीं दिखती क्योंकि सामान्य लेकिन पार्टी के समर्पित कार्यकर्त्ताओ ने कार्यालय आनालगभग बंद कर दिया है। पुरे प्रदेश में एक मात्र बिलासपुर जिला भाजपा ही ऐसा जहाँ के पदाधिकारी किसी कार्यक्रम, प्रेस वार्ता आदि में मंच पर बैठ जाते है। छग में ऐसा कही नहीं होता और तो और प्रवक्ता लोगों को भी मंच, माला, माइक से भारी लगाव है और इस चक्कर में मंच में बैठे बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला का फोटो तक गायब कर देते है। ये मामला कल का ही है। ऐसे लोगों को पद दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले भी अब पछता रहे है। क्योंकि दो साल तो ऐसे पदाधिकारी को झेलना ही पड़ेगा। हर पार्टी में गुतीय राजनीति रहती है, भाजपा भी इससे अछूता नहीं है लेकिन बिलासपुर जिले में जिस भाजपा को जिन भी नेताओं ने फर्श से अर्श तक पहुंचाने में दिन रत एक किया है वे भी बिलासपुर शहर भाजपा की स्थिति देख दुखी है। भाजपा के नेता प्रोटोकाल हासिल करने हर पल आतुर रहते हैं। मंत्री, सांसद, विधायक, संगठन के नेताओ के आगे पीछे घूमने और उनके कार्यक्रमों में जबरिया उनके साथ ठसने सामान्य बात हो गई हैं। ताकि संबंधित अधिकारियो पर वक्त पड़े तो दबाव बनाया जा सके। शहर जिला अध्यक्ष दीपक सिंह के क्रिया कलापो और व्यवहार को लेकर पार्टी के कार्यकर्ता नाखुश हैं लेकिन व्यक्त नहीं कर पा रहे है। कई लोगों का तो यह भी कहना है कि भाजपा में अब तक के निष्क्रिय अध्यक्ष की ज़ब भी चर्चा होगी वर्तमान अध्यक्ष का नाम सबसे ऊपर होगा।
एक बात और पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व ने ज़ब से छग के प्रभारी सहित अन्य पदाधिकारियो में बदलाव कर सौदान सिंह, अजय जमवाल आदि संगठन के नेताओं को दूसरे राज्यों में भेजा है तब से कई भाजपा नेता कलबला गये है। स्मृति ईरानी, कर्मवीर सिंह को छग का दायित्व मिलने के बाद अनेक नेता अपने पुराने फोटो फेसबुक फाइल से निकाल कर सोशल मिडिया में ऐसे प्रचार कर रहे है जैसे इन नेताओं से इनका पुराना और घनिष्ट संवध रहा है लेकिन वे जानते नहीं कि झारखण्ड और मुंबई के ये नेता कितने घाघ है।
