बीमारी ने दोनों आंखों की रोशनी छीन ली, फिर भी किसी के आगे हाथ फैलाने के बजाय मेहनत को बनाया सहारा

बिलासपुर। जिंदगी में मुश्किलें कितनी भी बड़ी क्यों न हों, अगर हौसला बुलंद हो तो इंसान हर चुनौती का सामना कर सकता है। इसकी मिसाल हैं विपिन, जिनकी बीमारी के चलते दोनों आंखों की रोशनी चली गई, लेकिन जिंदगी से लड़ने का जज्बा आज भी कायम है।

दोनों आंखों से दिखाई नहीं देने के बावजूद विपिन ने हार नहीं मानी। परिवार की जिम्मेदारी निभाने और दो वक्त की रोटी जुटाने के लिए वे अपने कंधों पर झोला टांगकर फेरी लगाने निकल पड़ते हैं। इस झोले में लोबान, धूप और अगरबत्ती जैसे पूजा-पाठ में इस्तेमाल होने वाले सामान रहते हैं। इन्हीं सामानों को बेचकर वे अपने परिवार का भरण-पोषण करने की कोशिश कर रहे हैं।
गुरुवार को विपिन फेरी करते हुए बिलासपुर प्रेस क्लब पहुंचे। वहां मौजूद लोगों के लिए उनका संघर्ष केवल सामान बेचने आए एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और हिम्मत की ऐसी मिसाल थी, जो बहुत कुछ सोचने पर मजबूर करती है।
आंखों की रोशनी भले ही बीमारी ने छीन ली हो, लेकिन विपिन के हौसले की रोशनी आज भी बरकरार है। परिस्थितियों के सामने घुटने टेकने के बजाय मेहनत को अपना सहारा बनाकर वे यह संदेश दे रहे हैं कि शारीरिक चुनौतियां इंसान के हौसले को कमजोर नहीं कर सकतीं।विपिन की कहानी समाज के लिए एक संदेश है कि किसी जरूरतमंद को केवल सहानुभूति नहीं, बल्कि सम्मान, सहयोग और अवसर भी मिलना चाहिए।
