पुलिस की गश्त पर उठे सवाल, अंधेरे चौक-चौराहे और बंद CCTV बने चोरों के लिए मुफीद

बीजापुर। शहर में गणेश विसर्जन का माहौल था। सड़कों पर गणपति बप्पा मोरया की जयकार गूंज रही थी और लोग भगवान गणेश की भक्ति में लीन थे। इसी भीड़ और उत्सव के बीच चोरों ने पुलिस की निगरानी को चुनौती देते हुए न्यू बस स्टैंड चौक के सामने एक साथ तीन दुकानों को निशाना बना लिया। ऑटो पार्ट्स, किराना और आर्ट की दुकानों में सेंधमारी की घटना सामने आने के बाद शहर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

बताया जा रहा है कि चोरों ने मौका देखकर दुकानों में एल्बेस्टर तोड़कर प्रवेश किया और चोरी की वारदात को अंजाम दिया। एक ही इलाके में एक साथ तीन दुकानों को निशाना बनाए जाने से व्यापारियों में भी चिंता का माहौल है। गणेश विसर्जन के दौरान शहर में पुलिस बल और सुरक्षा व्यवस्था तैनात होने के बावजूद चोरों का इस तरह वारदात को अंजाम देना रात्रिकालीन गश्त और पेट्रोलिंग व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
पुलिस की पेट्रोलिंग आखिर कहां थी?
गणेश विसर्जन जैसे बड़े आयोजन के दौरान शहर के प्रमुख इलाकों में पुलिस की विशेष निगरानी और लगातार पेट्रोलिंग की जरूरत होती है। इसके बावजूद न्यू बस स्टैंड जैसे व्यस्त इलाके में तीन दुकानों में एक साथ सेंधमारी हो जाना पुलिस की रात्रिकालीन निगरानी व्यवस्था पर सवालिया निशान लगाता है। व्यापारियों का सवाल है कि यदि पुलिस की गश्त लगातार जारी थी तो चोरों को इतनी बड़ी वारदात को अंजाम देने का मौका कैसे मिला?
अंधेरे में चौक-चौराहे, चोरों के लिए आसान रास्ता!
शहर की सुरक्षा व्यवस्था में एक और बड़ी खामी स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को लेकर सामने आ रही है। शहर के कई चौक-चौराहों और प्रमुख स्थानों पर बिजली के खंभे तो लगे हैं, लेकिन उन पर पर्याप्त रोशनी नहीं रहती। रात होते ही कई स्थान अंधेरे में डूब जाते हैं। ऐसे में सुनसान और अंधेरे हिस्से अपराधियों के लिए सुरक्षित ठिकाना साबित हो सकते हैं।

सड़कों पर CCTV कैमरे, लेकिन निगरानी व्यवस्था बेकार?
शहर में सुरक्षा के लिए CCTV कैमरे लगाए गए हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर कई कैमरों के बंद रहने की शिकायतें सामने आती रही हैं। यदि कैमरे चालू हालत में नहीं हैं तो लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई निगरानी व्यवस्था का उद्देश्य ही सवालों के घेरे में आ जाता है।
तीन दुकानों में हुई चोरी की घटना के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या घटनास्थल और आसपास लगे CCTV कैमरे चालू थे? यदि कैमरे बंद थे तो उन्हें समय रहते दुरुस्त क्यों नहीं कराया गया? और यदि चालू थे तो पुलिस को चोरों तक पहुंचने में कितनी मदद मिलेगी, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
नगर पालिका की व्यवस्था पर भी सवाल
शहर की स्ट्रीट लाइट और सार्वजनिक स्थानों पर प्रकाश व्यवस्था नगर पालिका की जिम्मेदारी से जुड़ी है। ऐसे में प्रमुख चौक-चौराहों के अंधेरे में डूबे रहने और खराब पड़ी लाइटों को लेकर नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। खंभे लगाने मात्र से सुरक्षा व्यवस्था पूरी नहीं होती, उन पर रोशनी भी जरूरी है। गणपति विसर्जन की भक्ति के बीच चोरी की वारदात ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है।
