हिंसा से शांति की ओर निर्णायक मोड़, विकास का नया अध्याय शुरू 

बस्तर संभाग में 1 जनवरी 2024 से अब तक 2756 माओवादियों का आत्मसमर्पण

बीजापुर। जिला जो कभी दंडकारण्य क्षेत्र में नक्सलवाद का मजबूत गढ़ माना जाता था, अब एक ऐतिहासिक बदलाव को ओर अग्रसर है। वर्षों तक यहां माओवादी संगठन की गहरी पकड़ रही, जहां कई गांवों में उनकी समानांतर व्यवस्था चलती थी और युवा बड़ी संख्या में संगठन से जुड़ते थे। टेकलगुडेम, मीनपा और नेशनल पार्क क्षेत्र जैसी घटनाएं इस हिंसक अतीत की गवाही देती हैं।

पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” अभियान के तहत दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) के साउथ सब जोनल ब्यूरो इंचार्ज SZCM पापाराव उर्फ अशोक उर्फ सुन्नम चन्द्रैया उर्फ मंगु ने अपने 17 साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया है। पापाराव संगठन का एक अत्यंत प्रभावशाली और वरिष्ठ नेता रहा है, जो वर्ष 1997 से माओवादी गतिविधियों में सक्रिय था और पश्चिम बस्तर सहित दक्षिण सब जोनल क्षेत्र का प्रभारी रह चुका है।

पापाराव पर अकेले 25 लाख रुपये का इनाम घोषित था और उसके खिलाफ बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा जिलों में दर्जनों गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। उसके साथ कुल 18 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया, जिन पर मिलाकर 87 लाख रुपये का इनाम घोषित था।

इस आत्मसमर्पण की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पापाराव दंडकारण्य क्षेत्र में माओवादी संगठन के अंतिम प्रभावशाली शीर्ष नेताओं में से एक माना जाता था। उसके संगठन छोड़ने से न केवल नेतृत्व स्तर पर बड़ा खालीपन पैदा हुआ है, बल्कि माओवादी ढांचे की रणनीतिक और संचालन क्षमता पर भी गहरा असर पड़ेगा।

समर्पण के दौरान इन कैडरों ने AK-47, SLR, INSAS सहित कुल 18 घातक हथियार और 12 लाख रुपये नकद भी सौंपे हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि संगठन की सैन्य ताकत को सीधा और गंभीर झटका लगा है। विशेषज्ञों के अनुसार, पापाराव जैसे वरिष्ठ और लंबे समय से सक्रिय नेता का आत्मसमर्पण माओवादी नेटवर्क के मनोबल को तोड़ने वाला साबित होगा। इससे न केवल संगठन के अंदर असंतोष बढ़ेगा, बल्कि शेष कैडरों पर भी मुख्यधारा में लौटने का दबाव बनेगा।

          बीजापुर और पूरे बस्तर संभाग में 1 जनवरी 2024 से अब तक 2756 माओवादियों का आत्मसमर्पण इस बात का संकेत है कि नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। शासन की पुनर्वास नीति, सुरक्षा बलों की रणनीति और स्थानीय लोगों के सहयोग से क्षेत्र में शांति और विकास का नया अध्याय लिखा जा रहा है। पापाराव का आत्मसमर्पण केवल एक व्यक्ति का मुख्यधारा में लौटना नहीं है, बल्कि यह नक्सलवाद की कमजोर होती जड़ों और बीजापुर में स्थायी शांति की मजबूत होती नींव का प्रतीक है।

gondwananews.com

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