“सरेंडर करने वालों को पुनर्वास, शक में बंद आदिवासियों को कब मिलेगा न्याय?”

बस्तर में उठी इंसाफ की आवाज़

बीजापुर। शुक्रवार को बड़ी संख्या में आदिवासी परिवार अपने वर्षों से जेल में बंद परिजनों की रिहाई की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे। परिजनों ने रैली निकालकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और मांग की कि नक्सल मामलों में विचाराधीन कैदियों के मामलों की मानवीय आधार पर समीक्षा की जाए।

इस दौरान विधायक विक्रम ने कहा कि “बस्तर अब नक्सल मुक्त होने की ओर बढ़ चुका है। ऐसे में जो ग्रामीण वर्षों से विचाराधीन कैदी के रूप में जेल में हैं, उनके मामलों की भी निष्पक्ष और मानवीय आधार पर समीक्षा होनी चाहिए।” उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे परिजनों के साथ मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उनकी मांग रखेंगे।

परिजनों का कहना है कि कई आदिवासियों को केवल शक के आधार पर या संघम सदस्य होने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया, जबकि उनके मुकदमे वर्षों से लंबित हैं। उनका आरोप है कि दूसरी ओर, कई कुख्यात नक्सलियों ने आत्मसमर्पण के बाद सरकार की पुनर्वास नीति के तहत न केवल कानूनी राहत पाई, बल्कि उन्हें मुख्यधारा में लौटने के लिए आर्थिक और सामाजिक सहयोग भी मिला।

प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि जब आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास की व्यवस्था हो सकती है, तो वर्षों से विचाराधीन ग्रामीणों के मामलों की शीघ्र सुनवाई और न्यायसंगत समीक्षा क्यों नहीं हो सकती।

इधर, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर जिला कांग्रेस कमेटी बीजापुर ने केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ पुतला दहन कर विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि आदिवासी समुदाय के साथ न्याय नहीं हो रहा है और निर्दोष लोगों को लंबे समय तक जेल में रखा जा रहा है। उन्होंने सरकार से विचाराधीन कैदियों के मामलों की विशेष समीक्षा कर जल्द न्याय सुनिश्चित करने की मांग की।

बीजापुर से उठी यह मांग अब केवल कानूनी प्रक्रिया का सवाल नहीं, बल्कि न्याय, मानवाधिकार और आदिवासी समाज के विश्वास से जुड़ा मुद्दा बनती जा रही है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है।

gondwananews.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You May Like