यह सिर्फ एक आपसी रंजिश का मामला नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था की नाकामी का भी उदाहरण बन गया है।

बिलासपुर। बिलासपुर की धार्मिक नगरी रतनपुर एक मुस्लिम परिवार के साथ मौत का तांडव खेला गया , लेकिन वजह आस्था नहीं बल्कि पुरानी रंजिश का होना बताया जा रहा हैं, अपराधियों नें बुजुर्ग महिला को भी नहीं बख्शा जिसकी मौत हो गईं, परिवार के अन्य आठ लोग को गंभीर अवस्था में उपचार केलिए सिम्स में दाखिल कराया जों जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं।

घटना जितनी दर्दनाक है, उससे कहीं ज्यादा चौंकाने वाला पुलिस का रवैया सामने आया है। पीड़ित परिवार का दावा है कि वारदात से एक दिन पहले ही उन्होंने रतनपुर थाने में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की थी। मगर राज्यपाल के दौरे का हवाला देकर उन्हें टाल दिया गया। सवाल सीधा है—अगर उसी वक्त कार्रवाई होती, तो क्या आज एक जान बच सकती थी?
हमलावरों ने जिस तरह घर में घुसकर तलवार और चाकू से हमला किया, वह दर्शाता है कि उन्हें किसी तरह का डर नहीं था। महिलाओं और बच्चों तक को नहीं बख्शा गया। यह सिर्फ एक आपसी रंजिश का मामला नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था की नाकामी का भी उदाहरण बन गया है।
घटना के बाद आरोपियों का खुद थाने पहुंचकर आत्मसमर्पण करना भी कई सवाल खड़े करता है। क्या उन्हें पहले से ही पुलिस की निष्क्रियता का अंदाजा था? क्या यही वजह थी कि उन्होंने इतनी बड़ी वारदात को अंजाम देने की हिम्मत की?अब पूरे मामले में पुलिस प्रशासन कठघरे में है। एक तरफ वीआईपी ड्यूटी, दूसरी तरफ आम नागरिकों की सुरक्षा—प्राथमिकता किसे मिलनी चाहिए, यह सवाल फिर से चर्चा में है। रतनपुर की यह घटना एक चेतावनी है कि अगर समय रहते शिकायतों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो छोटे विवाद भी बड़े अपराध में बदल सकते हैं। अब निगाहें जांच पर टिकी है।
