सड़क पर संघर्ष, संगठन में सवाल: बिलासपुर आंदोलन ने कांग्रेस को किस मोड़ पर ला खड़ा किया?

 लाठीचार्ज के बहाने कांग्रेस में नेतृत्व की जंग!

बिलासपुर। नीट पेपर लीक मामले को लेकर न्यायधानी बिलासपुर में हुआ एनएसयूआई का प्रदर्शन अब केवल एक छात्र आंदोलन नहीं रह गया है। नेहरू चौक में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू के बंगले के घेराव के दौरान हुए घटनाक्रम ने प्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को भी नई बहस दे दी है। पुलिस की सख्ती, लाठीचार्ज, विधायक देवेंद्र यादव के फटे कपड़े और उनकी आक्रामक मौजूदगी ने जहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नया जोश भरा, वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज की भूमिका और नेतृत्व क्षमता को लेकर सवाल भी खड़े कर दिए हैं हालांकि एनएसयूआई के इस प्रदर्शन को लेकर पुलिस प्रशासन को पहले से ही इस बात की उम्मीद हो गई थी कि जिस आंदोलन में देवेंद्र यादव शामिल हो रहा हो वह आंदोलन शांतिपूर्ण तो होगा ही नहीं और इसीलिए आंदोलन से निपटने पुलिस ने पूरे इंतजामात कर रखे थे ।ये कहे कि लाठी चार्ज भी पूर्व नियोजित था ,तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी ।पुलिस बल ने जिस तरह युवकों को दौड़ा दौड़ा कर पीटा वह कम आश्चर्य जनक नहीं था ।

3 जून 2026 को एनएसयूआई के बैनर तले नीट पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ प्रदर्शन आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों का लक्ष्य केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू के निवास का घेराव करना था। पुलिस ने पहले से ही व्यापक सुरक्षा व्यवस्था कर रखी थी। बैरिकेडिंग, वाटर कैनन और अतिरिक्त बल की तैनाती देखकर साफ संकेत मिल रहे थे कि प्रशासन किसी भी कीमत पर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने नहीं देगा।

स्थिति तब और गरमा गई जब भिलाई विधायक देवेंद्र यादव मौके पर पहुंचे। उनके पहुंचते ही कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ गया और बैरिकेड तोड़ने की कोशिश शुरू हो गई। पुलिस ने पहले वाटर कैनन का इस्तेमाल किया, लेकिन जब प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट की ओर तेजी से भागने लगे तो पुलिस को यह आशंका हो गई कि भीड़ कहीं उपमुख्यमंत्री के आवास की कुच कर गई है इसलिए हालात नियंत्रण से बाहर होते देख बिना कोई देरी किए  लाठीचार्ज कर दिया। गया। युवकों को दौड़ा दौड़ा कर पीटा गया जिससे कई युवक घायल हो गए। इस दौरान देवेंद्र यादव के कपड़े तक फट गए। इसके बाद वे बस की छत पर चढ़ गए और सरकार के खिलाफ जोरदार हुंकार भरते नजर आए। काफी मशक्कत के बाद पुलिस उन्हें नीचे उतार सकी और अन्य प्रदर्शनकारियों के साथ गिरफ्तार कर कोनी थाना ले गई।

वर्ष 2018 में पुलिस बल ने कांग्रेस भवन  के भीतर घुसकर किया था लाठीचार्ज

नेहरू चौक का यह घटनाक्रम  कांग्रेस के कई भुक्तभोगी और पीड़ित नेताओं को 18 सितंबर 2018 की उस घटना की याद दिला गया, जब बिलासपुर कांग्रेस भवन के भीतर घुसकर  पुलिस ने  बेरहमी पूर्वक लाठीचार्ज किया था। उस समय कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता घायल हुए थे और तत्कालीन भाजपा सरकार को भारी आलोचना झेलनी पड़ी थी। तब  तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने तत्काल सक्रियता दिखाई थी। घायल कार्यकर्ताओं से मिलने वे स्वयं अस्पताल पहुंचे थे। कांग्रेस ने उस घटना को बड़े राजनीतिक मुद्दे में बदल दिया था और कुछ ही महीनों बाद सत्ता परिवर्तन का रास्ता भी प्रशस्त हुआ था।

दीपक बैज की भूमिका पर  आखिर्चक्यों उठ रहे सवाल?

वर्तमान घटनाक्रम में सबसे अधिक चर्चा जिस विषय की हो रही है, वह है प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज की भूमिका। राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहे हैं कि जिस घटना ने पूरे प्रदेश में सुर्खियां बटोरीं, उस पर कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व ने  उतनी तेजी और आक्रामकता नहीं दिखाई  जितनी अपेक्षा की जा रही थी। कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव से पहले बड़े बदलाव के तहत दीपक बैज को प्रदेश अध्यक्ष बनाया था। पार्टी नेतृत्व का मानना था कि युवा चेहरे के रूप में वे संगठन में नई ऊर्जा भरेंगे और कांग्रेस को नई दिशा देंगे। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का एक वर्ग मानता है कि यह प्रयोग अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाया,दीपक बैज के नेतृत्व में कांग्रेस विधानसभा चुनाव हार गई। इसके बाद नगरीय निकाय और नगर पंचायत चुनावों में भी पार्टी को उम्मीद के अनुरूप सफलता नहीं मिली। लगातार चुनावी पराजयों ने संगठनात्मक क्षमता और नेतृत्व शैली को लेकर सवालों को और मजबूत कर दिया है।

क्या देवेंद्र यादव बन रहे हैं नए शक्ति केंद्र?

नीट आंदोलन के दौरान जिस तरह देवेंद्र यादव ने मोर्चा संभाला, वह कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। लाठीचार्ज झेलने से लेकर गिरफ्तारी तक वे आंदोलन के केंद्र में दिखाई दिए। उनकी आक्रामक शैली और सड़क पर संघर्ष करने वाली छवि ने कांग्रेस के युवा कार्यकर्ताओं के बीच उन्हें एक मéजानकारों का मानना है कि कांग्रेस इस समय ऐसे नेतृत्व की तलाश में है जो विपक्ष की भूमिका में सरकार को लगातार घेर सके और कार्यकर्ताओं को सड़क पर सक्रिय रख सके। ऐसे में देवेंद्र यादव की लगातार सक्रियता के क्या मायने हो सकते है?

हालांकि कांग्रेस नेतृत्व की ओर से इस संबंध में कोई संकेत नहीं मिला है, लेकिन संगठन के भीतर यह बहस जरूर तेज हो गई है कि क्या आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिए पार्टी को नए चेहरे और नई रणनीति की आवश्यकता है।

दिल्ली तक पहुंची बिलासपुर  लाठी चार्ज की गूंज

 3 जून को बिलासपुर में हुआ यह लाठीचार्ज अब स्थानीय घटना नहीं रह गया है। इसकी राजनीतिक गूंज रायपुर से लेकर दिल्ली तक सुनाई दे रही है। कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का मुद्दा बना रही है, जबकि भाजपा कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस कार्रवाई को उचित बता रही है। इससे अलग हटकर बिलासपुर की जनता का मानना है कि बड़े दिनों बाद कांग्रेस का प्रभावी आंदोलन देखने को मिला है।

इस पूरे घटनाक्रम से एक बात स्पष्ट हो गई है कि विपक्ष में बैठी कांग्रेस के भीतर संगठन में  नेतृत्व को लेकर नई चर्चा शुरू हो चुकी है। सवाल यह है कि क्या दीपक बैज के नेतृत्व राजनीति को भी गर्माने लगी है।

gondwananews.com

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