रतनपुर से सरगांव–परसदा तक संचालित कोल डिपो 24 घंटे दिन-रात कोयले के अवैध कटिंग का अड्डा बना हैं, खनिज अधिकारी इन डिपो की भंडारण क्षमता की जांच करना जरूरी नहीं समझते

कोल माईनस से निकलने वाले ट्रक मालिकों का डिपो संचालकों से रहता है गहरा याराना 

बिलासपुर। रतनपुर से लेकर परसदा तक का पूरा इलाका इन दिनों कोयले के खुले काले बाज़ार का गढ़ बन चुका है। हैरानी की बात यह है कि यह पूरा अवैध कारोबार माइनिंग अधिकारियों के संरक्षण में धड़ल्ले से चल रहा है। कुछ लोग तो सरकारी जमीन पर कोयले से लदी ट्रक की आवाजाही के लिए रास्ता बनवा लिए है सालों पूर्व पंचायत से दबाव पूर्वक या मिलीभगत कर सरकारी जमीन का कोयला गाड़ियों के आने जाने के लिए उपयोग करने प्रस्ताव पारित कर व्यवसायिक उपयोग करते आ रहे है। ज्यादातर कोल डिपो संचालक बिना किसी डर के खुलेआम कोयले की कटिंग और हेराफेरी को अंजाम दे रहे हैं, जबकि जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं।

एफ-रोम, बी-रोम और ई-स्ट्रीम श्रेणी का कोयला इंडस्ट्रियल व फैक्ट्री उपयोग के लिए डीओ के माध्यम से कोरबा, हरदीबाज़ार, दीपका और विजय वेस्ट खदानों से रोज़ाना हजारों टन ट्रकों में लोड होकर रवाना होता है। लेकिन फैक्ट्रियों तक पहुंचते-पहुंचते उसी कोयले की क्वालिटी रहस्यमयी तरीके से गिर जाती है। यह कोई संयोग नहीं, बल्कि सुनियोजित लूट और मिलावट का खेल है, जिसमें डिपो संचालक और माइनिंग अधिकारी दोनों मालामाल हो रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, खनिज विभाग के अधिकारियों को उनकी तनख्वाह से पहले ही हर महीने मोटा कमीशन पहुंच जाता है। इसी वजह से रतनपुर से सरगांव–परसदा तक 50 से अधिक कोल डिपो 24 घंटे दिन-रात अवैध कटिंग का अड्डा बने हुए हैं। नियमों के मुताबिक इन डिपो की भंडारण क्षमता सीमित है—कहीं 20 हजार टन तो कहीं 25 हजार टन—लेकिन इसके बावजूद भारी मात्रा में कोयले का अवैध स्टॉक रतनपुर क्षेत्र में खड़ा किया जा रहा है।

असल खेल बी-रोम कोयले की ट्रकों से कटिंग कर किया जा रहा है। डिपो संचालक 10 से 15 टन उच्च गुणवत्ता वाला बी-रोम कोयला निकालकर उसकी जगह घटिया किस्म का एफ-रोम कोयला मिलाकर ट्रक मालिकों को थमा देते हैं। इस खेल में ट्रक मालिकों को भी अच्छा मुनाफा मिलता है, जबकि डिपो संचालकों के हाथ आधे दाम में उम्दा कोयला लग जाता है। बाद में इसी चोरी के कोयले को एसईसीएल के डीओ में कागज़ों पर खपाया जाता है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सब कुछ खुलेआम चल रहा है, तो प्रशासन और खनिज विभाग आखिर कब तक मूकदर्शक बने रहेंगे? या फिर यह मान लिया जाए कि पूरा सिस्टम ही इस काले कारोबार का हिस्सेदार बन चुका है।

gondwananews.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

महामाया नगरी में कोल डिपो पर चलेगा बुलडोजर ? 25 किमी नियम दोहराया, तोखन साहू ने दिए जांच के संकेत.. कहा...25 किलोमीटर नियम का होगा पालन रतनपुर में कोल डिपो पर संकट, केंद्रीय मंत्री बोले - नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई

Thu Jan 8 , 2026
बिलासपुर। माता महामाया मंदिर परिसर और उसके आसपास संचालित कोल डिपो को लेकर केंद्रीय मंत्री तोखन साहू ने सख्त रुख अपनाते हुए साफ कहा है कि महामाया मंदिर के आसपास मौजूद सभी कोल डिपो हटाए जाएंगे और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने दोहराया कि शासन के निर्देशों के अनुसार मुख्य […]

You May Like

Breaking News